माता-पिता की देखभाल से मुंह मोड़ना पड़ेगा भारी, दुर्व्यवहार पर संपत्ति से बेदखली का रास्ता साफ
नई दिल्ली। बुजुर्ग माता-पिता के अधिकारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि बेटे या बहू द्वारा माता-पिता के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है या उनकी उचित देखभाल नहीं की जाती, तो परिस्थितियों के अनुसार उन्हें संपत्ति से बेदखल करने की कार्रवाई की जा सकती है।
यह मामला लखनऊ के विकास नगर स्थित एक आवासीय मकान से जुड़ा है। मामले में 81 वर्षीय बुजुर्ग महिला को कथित तौर पर जबरन वृद्धाश्रम भेजे जाने का आरोप सामने आया था। इसके बाद संपत्ति के मालिक रवि कांत गुप्ता ने 5 जून 2022 को जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत अपने बेटे को संपत्ति से बेदखल करने की मांग की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, सुरक्षा और शांतिपूर्ण जीवन के अधिकार को महत्वपूर्ण माना। कोर्ट के फैसले ने यह संदेश स्पष्ट किया है कि बुजुर्ग माता-पिता के साथ दुर्व्यवहार या उनकी उपेक्षा को केवल पारिवारिक विवाद मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
हालांकि, संपत्ति से बेदखली स्वतः हर मामले में लागू नहीं होती। कार्रवाई संबंधित कानून, संपत्ति के स्वामित्व और मामले के तथ्यों के आधार पर सक्षम प्राधिकारी या न्यायालय के आदेश से होती है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से उन बुजुर्ग माता-पिता को कानूनी संरक्षण की उम्मीद मिली है, जो अपने ही बच्चों द्वारा उपेक्षा या दुर्व्यवहार का सामना कर रहे हैं।

