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आंखों में आंसू, चेहरे पर डर और कंधों पर ऐसा बोझ, जिसे उठाने की ताकत शायद किसी बच्चे में नहीं होती।

आंखों में आंसू, चेहरे पर डर और कंधों पर ऐसा बोझ, जिसे उठाने की ताकत शायद किसी बच्चे में नहीं होती। यह दर्दनाक कहानी उत्तर प्रदेश के एटा से सामने आई है, जिसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया। दिनांक: 15 जनवरी
यहां एक मासूम अपनी मां की लाश के पास बैठा रोता रहा और खुद ही अपने आंसू पोंछता रहा। मां अब कभी उसकी आवाज नहीं सुन पाएगी, यह एहसास उसे भीतर ही भीतर तोड़ रहा था।
बच्चे की मां नीलम पिछले पांच दिनों से अस्पताल में भर्ती थीं। बीमारी से जूझते हुए आखिरकार उनकी मौत हो गई। पिता का निधन एक साल पहले ही हो चुका था। घर में अब सिर्फ वह मासूम और उसकी बड़ी बहन ही बचे हैं।
मां की मौत के बाद न कोई रिश्तेदार आगे आया, न ही किसी ने कंधा देने की हिम्मत दिखाई। मजबूर होकर बच्चे ने खुद हौसला जुटाया और अपनी मां की लाश को पोस्टमार्टम हाउस तक पहुंचाया। वहां वह घंटों बैठा रोता रहा, लेकिन उसकी चीख-पुकार सुनने वाला कोई नहीं था।
मासूम का आरोप है कि रिश्तेदार जमीन हड़पने के इरादे से उसकी मदद नहीं कर रहे और उसे धमका रहे हैं। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची, बच्चे को गले लगाकर ढांढस बंधाया और हरसंभव कानूनी मदद का भरोसा दिया। यह कहानी समाज की संवेदनहीनता पर एक गहरा सवाल छोड़ जाती है।

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