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बृजेश पाठक: जनता के सच्चे सेवक


उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक को प्रदेश की राजनीति में एक ऐसे जनप्रतिनिधि के रूप में देखा जाता है, जो स्वयं को सत्ता का नहीं, बल्कि जनता का सेवक मानते हैं। उनका राजनीतिक जीवन जनसरोकारों, सामाजिक न्याय और विकास के मुद्दों के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण रहा है।
बृजेश पाठक का मानना है कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि का पहला दायित्व जनता की समस्याओं को समझना और उनका समाधान सुनिश्चित करना है। यही कारण है कि वे अक्सर आम नागरिकों के बीच पहुंचकर उनकी शिकायतें सुनते हैं और संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश देते हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा और कानून-व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उनकी सक्रियता साफ दिखाई देती है।
एक जनसेवक के रूप में उनकी कार्यशैली सरल और संवादात्मक रही है। वे जनता से सीधा संवाद स्थापित करने में विश्वास रखते हैं। विभिन्न कार्यक्रमों, निरीक्षणों और जनसभाओं के माध्यम से वे लोगों से जुड़े रहते हैं। उनकी यह सोच कि “पद जिम्मेदारी का प्रतीक है, विशेषाधिकार का नहीं”, उन्हें अन्य नेताओं से अलग पहचान देती है।
प्रदेश के विकास के लिए वे प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी जोर देते हैं। उनका प्रयास रहता है कि सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचे।
निस्संदेह, उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक की पहचान एक ऐसे नेता के रूप में स्थापित हो रही है, जो जनता की सेवा को ही अपना धर्म मानते हैं। उनका सार्वजनिक जीवन इस बात का उदाहरण है कि सच्ची राजनीति वही है, जो जनकल्याण और समर्पण की भावना से प्रेरित

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