मुंबई। मुंबई की एक विशेष अदालत ने 9 साल पुराने छेड़छाड़ के मामले में एक युवक को तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि नाबालिग लड़की का पीछा करना और उसे ‘फ्लाइंग किस’ जैसी अशोभनीय हरकत करना यौन उत्पीड़न की श्रेणी में आता है और यह पीड़िता की गरिमा का गंभीर उल्लंघन है।
अदालत ने माना कि आरोपी ने लगातार पीड़िता का पीछा कर उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। न्यायालय ने कहा कि इस प्रकार की हरकतें समाज में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा के लिए खतरा हैं तथा ऐसे मामलों में कठोर दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।
फैसले के तहत अदालत ने आरोपी को तीन साल की सजा के साथ 3,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न भरने की स्थिति में अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि किसी भी नाबालिग के साथ इस तरह का व्यवहार उसकी गरिमा, आत्मसम्मान और सुरक्षित वातावरण के अधिकार का उल्लंघन है। यह फैसला ऐसे अपराधों के प्रति न्यायपालिका की सख्त सोच को दर्शाता है और समाज को स्पष्ट संदेश देता है कि महिलाओं और बच्चियों के सम्मान से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

