कानपुर। रक्षाबंधन के मौके पर कानपुर कलेक्ट्रेट में संवेदनशीलता और इंसानियत की ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसने हर किसी का दिल छू लिया। एक मां अपनी बेटी की पढ़ाई बचाने की गुहार लेकर जिलाधिकारी के पास पहुंची थी। बेटी ने डीएम की कलाई पर राखी बांधी तो यह मुलाकात एक भावुक भाई-बहन के रिश्ते में बदल गई। डीएम ने भी राखी का मान रखते हुए भाई का फर्ज निभाया और बेटी की पढ़ाई में मदद का जिम्मा उठाया।
कलेक्ट्रेट में जनता दर्शन के दौरान नौबस्ता निवासी ललिता यादव अपनी बेटी इशु यादव के साथ जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के पास पहुंचीं। आर्थिक तंगी के चलते इशु की स्कूल फीस कई महीनों से जमा नहीं हो पाई थी और बकाया फीस करीब 29 हजार रुपये पहुंच गई थी। मां को चिंता थी कि आर्थिक मजबूरी कहीं बेटी की पढ़ाई न रोक दे।
इसी दौरान इशु ने डीएम से उन्हें राखी बांधने की इच्छा जताई। डीएम ने बच्ची की भावनाओं का सम्मान किया और इशु ने उनकी कलाई पर राखी बांधी। राखी बंधते ही डीएम ने भी इस रिश्ते को सिर्फ औपचारिकता तक सीमित नहीं रखा।
डीएम ने करीब 29 हजार रुपये की बकाया फीस में आधी राशि स्वयं जमा कराई, जबकि शेष आधी फीस स्कूल के प्रधानाचार्य से बातचीत कर माफ कराई गई। इतना ही नहीं, बेटी को स्कूल आने-जाने में परेशानी न हो, इसके लिए डीएम ने उसे साइकिल भी दिलाई और उपहार देकर उसका हौसला बढ़ाया।
इशु नौबस्ता स्थित केपी वाईजन सहयोगी इंटर कॉलेज में कक्षा 12वीं की छात्रा है और पढ़ाई में होनहार बताई जा रही है। उसके पिता का वर्ष 2017 में निधन हो चुका है। इसके बाद परिवार की जिम्मेदारी मां ललिता यादव के कंधों पर है। वह घरों में काम करके परिवार का खर्च चलाती हैं और अपनी बेटी की पढ़ाई जारी रखने के लिए संघर्ष कर रही हैं।
रक्षाबंधन पर डीएम की इस पहल ने यह संदेश दिया कि सरकारी पद सिर्फ जिम्मेदारियां निभाने का नाम नहीं, बल्कि जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशील होने का भी माध्यम है। एक राखी ने जहां भाई-बहन का भावनात्मक रिश्ता बनाया, वहीं डीएम की मदद ने एक बेटी की पढ़ाई के रास्ते में खड़ी आर्थिक मुश्किल को भी दूर कर दिया।

