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वीडियो कॉल पर विदाई: अपनों के इंतज़ार में बुझ गई एक पिता की आखिरी उम्मीद”


सोनीपत के वृद्धाश्रम से झकझोर देने वाली कहानी, अंतिम दर्शन भी नहीं कर सकीं बेटियां
सोनीपत। हर माता-पिता की सबसे बड़ी पूंजी उनकी संतान होती है, लेकिन हरियाणा के सोनीपत स्थित एक वृद्धाश्रम से सामने आई घटना ने रिश्तों की संवेदनहीनता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्ग शिवचरण गुप्ता अपनी बेटियों से अंतिम बार मिलने की आस लगाए रहे। बताया जाता है कि उनकी तबीयत खराब होने की सूचना लगभग 20 दिन पहले परिवार को दे दी गई थी, लेकिन कोई उनसे मिलने नहीं पहुंचा।
आखिरकार शिवचरण गुप्ता ने दुनिया को अलविदा कह दिया। सबसे मार्मिक दृश्य तब सामने आया जब उनकी बेटियों ने अपने पिता के अंतिम संस्कार को केवल वीडियो कॉल के माध्यम से देखा। यह घटना केवल एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि बदलते सामाजिक मूल्यों और रिश्तों में बढ़ती दूरियों का दर्दनाक उदाहरण बन गई है।
समाज के लिए यह एक गहरी सीख है कि माता-पिता अपने जीवन की हर खुशी और सुविधा अपने बच्चों के भविष्य के लिए समर्पित कर देते हैं, लेकिन जीवन की अंतिम घड़ियों में उन्हें केवल अपने अपनों का साथ और अपनापन चाहिए होता है।
विशेषज्ञों और समाजसेवियों का मानना है कि वृद्धाश्रमों की बढ़ती संख्या से अधिक चिंता की बात यह है कि वहां रहने वाले बुजुर्ग अपने ही परिवार के होते हैं। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक दायित्व है कि वह अपने माता-पिता और बुजुर्गों को समय दे, उनका सम्मान करे और उन्हें कभी अकेलापन महसूस न होने दे।
संदेश:
“धन-दौलत दोबारा कमाई जा सकती है, लेकिन माता-पिता का साथ दोबारा कभी नहीं मिलता। जब तक वे हमारे साथ हैं, उन्हें अपना समय, सम्मान और प्रेम अवश्य दें।”

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