हरिद्वार। उत्तराखंड पुलिस की तेजतर्रार और बेबाक आईपीएस अधिकारी श्वेता चौबे एक बार फिर सुर्खियों में हैं। पुलिस महकमे में उन्हें “लेडी सिंघम” और “उत्तराखंड की शेरनी” जैसे नामों से जाना जाता है। अपनी सख्त कार्यशैली, अपराधियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई और उत्कृष्ट नेतृत्व क्षमता के कारण उन्होंने पुलिस विभाग में एक अलग पहचान बनाई है।
श्वेता चौबे की उपलब्धियों और सम्मान की सूची काफी लंबी है। इससे पहले वह चमोली की पुलिस अधीक्षक (एसपी) और पौड़ी की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) सहित कई महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी सफलतापूर्वक निभा चुकी हैं। जहां भी उनकी तैनाती रही, वहां कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए उनके कार्यों की सराहना हुई।
श्वेता चौबे का संबंध एक प्रतिष्ठित पुलिस परिवार से है। वह छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में एसपी रहे दिवंगत आईपीएस विजय शंकर चौबे की पुत्री हैं। विजय शंकर चौबे अपनी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए दो बार राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित हुए थे और बाद में छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) पद तक पहुंचे। उनका मूल निवास छत्तीसगढ़ के सारंगढ़ में था।
श्वेता चौबे का बचपन दुर्ग सहित छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में बीता, जहां उन्होंने अपने पिता को ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के साथ पुलिस सेवा करते देखा। यही संस्कार और प्रेरणा उन्हें भी पुलिस सेवा में लेकर आए। आज वह अपनी कार्यशैली और नेतृत्व क्षमता के दम पर उत्तराखंड पुलिस की सबसे चर्चित अधिकारियों में गिनी जाती हैं।
जनता के बीच उनकी छवि एक सख्त लेकिन संवेदनशील अधिकारी की रही है। यही वजह है कि जहां एक ओर आम लोग उन पर भरोसा जताते हैं, वहीं दूसरी ओर अपराधी उनके नाम से खौफ खाते हैं।

