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एक औरत के लिए अपने पति को खोना

एक औरत के लिए अपने पति को खो देना, जीवन की सबसे दर्दनाक परीक्षाओं में से एक है। यह सिर्फ एक व्यक्ति का जाना नहीं होता, बल्कि उसके साथ एक पूरी दुनिया, एक पूरा सहारा, एक पूरा जीवन धीरे-धीरे उसकी उंगलियों से फिसल जाता है। वह क्षण, जब उसे एहसास होता है कि उसका जीवनसाथी अब कभी लौटकर नहीं आएगा, वही क्षण उसके अंदर एक ऐसी खाली जगह बना देता है जो जीवन भर नहीं भरती।

पति का जाना एक ऐसा दुःख है जो अक्सर शब्दों से परे होता है। वह अपने भीतर टूट जाती है, लेकिन बाहर से खुद को संभालकर रखने की कोशिश करती है—क्योंकि अब उसे सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए मजबूत बनना पड़ता है। उसकी आंखों में भले आँसू सूख जाएँ, मगर दिल हर दिन थोड़ा-थोड़ा रोता रहता है।

दिन बीतते हैं, लेकिन आदतें नहीं मिटतीं—चाय के कप का दूसरा हिस्सा, रात को दरवाज़ा बंद करने की आवाज़, घर के कोनों में बसी खुशबू, और तकिए पर रह गई धीमी-सी गर्माहट… सब कुछ उसे याद दिलाता है कि कोई था, जो अब नहीं है।

समाज भी उसके दर्द को कम नहीं करता। कभी सहानुभूति के नाम पर दया, कभी बेवजह सवाल, और कभी सलाह के रूप में बोझ—ये सब उसे भीतर से और तोड़ते हैं। वह सिर्फ अपने दुःख से नहीं लड़ती, बल्कि दुनिया की उम्मीदों और नजरों से भी लड़ती है।

फिर भी, औरत होना ही शायद उसकी सबसे बड़ी ताकत है। वह धीरे-धीरे अपने बिखरे हुए जीवन को समेटती है, आँसुओं को दिल के किसी कोने में छिपा लेती है और अपने बच्चों, अपने परिवार के लिए नया साहस जुटाती है। जिंदगी आगे बढ़ती है, लेकिन भीतर कहीं एक कोना हमेशा उसी के नाम सुरक्षित रहता है—उस प्यार के लिए, उस रिश्ते के लिए, उस आदमी के लिए जिसने उसके जीवन को अर्थ दिया था।

पति को खोना उसके दिल का आधा हिस्सा खो देना है—एक ऐसा हिस्सा जो कभी वापस नहीं आता। लेकिन फिर भी वह जीती है, मुस्कुराती है, संभालती है, क्योंकि उसके भीतर एक अटूट शक्ति छुपी होती है—वह शक्ति जो सिर्फ एक औरत के पास होती है।

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