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पद से विदाई, सपनों से नहीं… IAS दिव्या मित्तल की नई पारी का इंतजार, अब कुर्सी नहीं—‘लोगों के विश्वास’ को मानती हैं अपनी असली ताकत।”

IAS दिव्या मित्तल ने छोड़ा पद, लेकिन सपने नहीं… अब ‘अपने लोगों’ के लिए नई पारी के संकेत

लखनऊ। भारतीय प्रशासनिक सेवा की चर्चित अधिकारी दिव्या मित्तल ने रविवार को अपनी इच्छा से इस्तीफा देकर प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक भावुक पोस्ट के जरिए अपने इस्तीफे की जानकारी सार्वजनिक की। लेकिन उनकी पोस्ट को गौर से पढ़ें तो यह केवल एक सरकारी पद से विदाई नहीं, बल्कि एक नई यात्रा की शुरुआत का संकेत भी नजर आती है।

दिव्या मित्तल ने अपने कार्यकाल के अनुभवों को याद करते हुए खास तौर पर देवरिया और मीरजापुर को अपनी सीख और जीवन की महत्वपूर्ण यात्राओं से जोड़ा। उनके शब्दों में अनुभव भी है, आत्ममंथन भी और भविष्य की दिशा की एक हल्की-सी झलक भी।

उन्होंने लिखा—
“देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है।”

यह सिर्फ एक प्रशासनिक अनुभव का जिक्र नहीं लगता। इस एक वाक्य ने कई सवालों को जन्म दे दिया है। क्या दिव्या मित्तल अब किसी ऐसे रास्ते पर आगे बढ़ने का मन बना चुकी हैं, जहां उन्हें अपने फैसले स्वयं लेने की अधिक स्वतंत्रता मिलेगी? क्या वह अब किसी पद की सीमाओं से बाहर निकलकर ‘सही’ के साथ खड़े होने की अपनी सोच को व्यापक रूप देना चाहती हैं?

मीरजापुर ने दिया आध्यात्मिक जुड़ाव

मीरजापुर के कार्यकाल को याद करते हुए दिव्या मित्तल ने अपने भावनात्मक और आध्यात्मिक जुड़ाव को भी बेहद खूबसूरती से व्यक्त किया।

उन्होंने लिखा—
“मां विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है।”

यही पंक्ति उनके इस्तीफे के मायने को और गहरा कर देती है। एक IAS अधिकारी के लिए पद निश्चित रूप से शक्ति और जिम्मेदारी का माध्यम होता है, लेकिन दिव्या मित्तल के शब्द बताते हैं कि उनके लिए असली ताकत शायद कुर्सी से अधिक जनता के विश्वास में रही है।

पद छोड़ा है, सपना नहीं

दिव्या मित्तल की पोस्ट का सबसे महत्वपूर्ण और शायद सबसे ज्यादा चर्चा में आने वाला संदेश यही है कि उन्होंने पद छोड़ा है, सपने नहीं।

उन्होंने लिखा—
“अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना बाकी है।”

इस एक वाक्य ने उनकी अगली पारी को लेकर अटकलों को तेज कर दिया है।

आखिर ‘अपने लोगों’ के लिए देखे गए वे सपने क्या हैं? क्या उनकी अगली यात्रा शिक्षा के क्षेत्र में होगी? क्या वह युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के साथ काम करेंगी? या फिर लेखन और सामाजिक सरोकारों के माध्यम से लोगों तक पहुंचेंगी?

इन सवालों का जवाब अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन उनके अब तक के काम और रुचियों को देखें तो कई संभावनाएं दिखाई देती हैं।

प्रशासन के साथ शिक्षा और लेखन से भी जुड़ाव

दिव्या मित्तल केवल प्रशासनिक अधिकारी के रूप में ही नहीं, बल्कि शिक्षा और लेखन से भी जुड़ी रही हैं। उन्होंने अपने खाली समय में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को पढ़ाया है। इसके अलावा वह दो पुस्तकें भी लिख चुकी हैं।

यानी प्रशासनिक सेवा से बाहर निकलने के बाद उनके सामने विकल्पों की कमी नहीं है। शिक्षा, युवाओं का मार्गदर्शन, लेखन, सामाजिक कार्य या फिर इन सभी का कोई नया संगम—उनकी अगली पारी किस रूप में सामने आएगी, यह आने वाला समय बताएगा।

‘हर सरकारी फाइल के पीछे एक इंसान है’

दिव्या मित्तल की पोस्ट का सबसे संवेदनशील हिस्सा वह है, जहां उन्होंने अपने प्रशासनिक अनुभव को आम लोगों की जिंदगी से जोड़कर देखा।

उन्होंने लिखा कि उनके लिए जीवन का असली सुकून उस परिवार की आंखों में दिखाई दिया, जिसे पहली बार जमीन का हक मिला। उस दिव्यांग व्यक्ति में मिला, जिसे सम्मान के साथ जीने का अवसर मिला। उस किसान में मिला, जिसके खेत तक पानी पहुंचा।

और फिर उन्होंने लिखा—

“हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाए रखना ही न्याय है।”

शायद यही उनके पूरे प्रशासनिक जीवन का सबसे बड़ा सार भी है।

एक अधिकारी के लिए फाइल एक कागज हो सकती है, लेकिन उस फाइल के पीछे किसी परिवार की उम्मीद, किसी किसान की फसल, किसी गरीब की छत, किसी दिव्यांग का सम्मान या किसी व्यक्ति के जीवन का संघर्ष छिपा हो सकता है।

दिव्या मित्तल ने अपने अनुभवों से यही सीखा और उसे शब्दों में भी उतारा।

अब सबसे बड़ा सवाल—अगली पारी क्या होगी?

IAS सेवा से इस्तीफा देने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि दिव्या मित्तल की अगली पारी क्या होगी?

क्या वह शिक्षा के क्षेत्र में कोई बड़ा कदम उठाएंगी?
क्या प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के लिए कोई नया मंच तैयार करेंगी?
क्या लेखन के जरिए अपने विचारों और अनुभवों को लोगों तक पहुंचाएंगी?
या फिर सामाजिक क्षेत्र में उतरकर उन सपनों को पूरा करने की कोशिश करेंगी, जिनका जिक्र उन्होंने अपनी पोस्ट में किया है?

फिलहाल इन सवालों के जवाब उनके पास हैं और सार्वजनिक रूप से कोई स्पष्ट घोषणा सामने नहीं आई है। लेकिन उनकी पोस्ट यह जरूर संकेत देती है कि यह अंत नहीं, एक नए अध्याय की शुरुआत है।

दिव्या मित्तल ने सरकारी सेवा में रहते हुए प्रशासन को करीब से देखा, लोगों की समस्याओं को समझा और उनके समाधान की कोशिश की। अब शायद वह उसी अनुभव को एक अलग मंच पर लेकर आगे बढ़ना चाहती हैं।

कुर्सी से दूरी जरूर बनी है, लेकिन लोगों से जुड़ाव कम नहीं हुआ—बल्कि उनकी पोस्ट के शब्दों को देखें तो लगता है कि अब उसी जुड़ाव को उनकी अगली पारी की सबसे बड़ी ताकत बनाया जाएगा।

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