उत्तर प्रदेश की राजनीति में जब भी मजबूत नेतृत्व की चर्चा होती है, तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। उनके समर्थकों का मानना है कि योगी आदित्यनाथ किसी व्यक्ति विशेष की पसंद से “सिलेक्टेड” नहीं हुए, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से जनता के जनादेश से “इलेक्टेड” मुख्यमंत्री बने हैं। यही कारण है कि आज भी उनके समर्थन में यह नारा सुनाई देता है— “जनता की पुकार, तीसरी बार।”
भारत का लोकतंत्र जनता की सर्वोच्च शक्ति पर आधारित है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 में भारतीय जनता पार्टी को ऐतिहासिक बहुमत मिला और विधायक दल ने योगी आदित्यनाथ को अपना नेता चुना। इसके बाद वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा को दोबारा स्पष्ट जनादेश प्राप्त हुआ और योगी आदित्यनाथ लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बने। उत्तर प्रदेश के इतिहास में लंबे अंतराल के बाद किसी मुख्यमंत्री का लगातार दूसरी बार पूर्ण कार्यकाल के बाद सत्ता में लौटना एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना माना गया।
योगी सरकार के समर्थक दावा करते हैं कि उनके कार्यकाल में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने, अपराध पर नियंत्रण, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, मेडिकल कॉलेज, निवेश, धार्मिक पर्यटन, औद्योगिक विकास और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य हुए हैं। अयोध्या, काशी, मथुरा, प्रयागराज और अन्य धार्मिक स्थलों के विकास को भी उनके समर्थक सरकार की बड़ी उपलब्धियों में गिनते हैं।
हालांकि, किसी भी लोकतंत्र में सरकार के कार्यों का मूल्यांकन अलग-अलग दृष्टिकोण से किया जाता है। जहां समर्थक इन कार्यों को विकास और सुशासन का प्रमाण बताते हैं, वहीं विपक्ष कई नीतियों और निर्णयों पर सवाल भी उठाता है। यही लोकतंत्र की खूबसूरती है कि हर नागरिक को अपनी राय रखने और सरकार के कामकाज का आकलन करने का अधिकार है।
“जनता की पुकार, तीसरी बार” एक राजनीतिक नारा है, जो योगी आदित्यनाथ के समर्थकों की उम्मीद और विश्वास को व्यक्त करता है। लेकिन यह भी उतना ही सत्य है कि किसी भी नेता या दल का भविष्य केवल और केवल जनता के मत से तय होता है। चुनाव के दिन मतदाता ही अंतिम निर्णय देता है कि उसे किसे शासन की जिम्मेदारी सौंपनी है।
इसलिए यह कहना अधिक उचित होगा कि योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक सफर लोकतांत्रिक जनादेश पर आधारित रहा है। भविष्य में वे तीसरी बार मुख्यमंत्री बनेंगे या नहीं, इसका निर्णय भी उत्तर प्रदेश की जनता ही करेगी। लोकतंत्र में जनता का फैसला ही सर्वोपरि होता है, और वही किसी भी नेता की वास्तविक ताकत है।

