• Tue. Jul 21st, 2026

पवित्र ग्रंथ श्रीमद्भगवद्गीता का अपमान क्यों?


हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसमें श्रीमद्भगवद्गीता की प्रतियों के ऊपर मिठाई की प्लेट रखी हुई दिखाई दे रही है। यह दृश्य अनेक लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला प्रतीत हुआ। यदि यह वास्तव में हुआ है, तो यह केवल एक पुस्तक का नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का प्रश्न है।
श्रीमद्भगवद्गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि जीवन जीने की कला, कर्तव्य, सत्य, धर्म और कर्मयोग का अमूल्य संदेश देने वाला विश्वविख्यात ग्रंथ है। भारत ही नहीं, दुनिया के अनेक देशों में इसका अध्ययन किया जाता है। न्यायालयों, विश्वविद्यालयों और अनेक विद्वानों ने भी गीता के ज्ञान को मानव जीवन के लिए प्रेरणादायक माना है।
किसी भी पवित्र ग्रंथ को मेज, स्टूल या तख्त की तरह उपयोग करना उचित नहीं माना जाता। यदि किसी ने सुविधा के लिए गीता की प्रतियों के ऊपर मिठाई रख दी, तो यह संवेदनशीलता और सम्मान की कमी को दर्शाता है। चाहे यह कार्य जानबूझकर किया गया हो या अनजाने में, ऐसे दृश्य लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत कर सकते हैं।
हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी घटना पर अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले उसके पूरे संदर्भ को समझना आवश्यक है। केवल एक तस्वीर या वीडियो के आधार पर किसी व्यक्ति की मंशा के बारे में निश्चित दावा करना उचित नहीं है। यदि यह भूलवश हुआ है, तो संबंधित लोगों को इसे स्वीकार करते हुए भविष्य में ऐसी गलती न दोहराने का संकल्प लेना चाहिए।
भारत विविध आस्थाओं का देश है। जिस प्रकार हम कुरआन, बाइबिल, गुरु ग्रंथ साहिब, त्रिपिटक और अन्य सभी पवित्र ग्रंथों का सम्मान करते हैं, उसी प्रकार श्रीमद्भगवद्गीता का भी सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। किसी भी धर्म के पवित्र ग्रंथ का अनादर सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकता है।
आस्था का सम्मान ही सभ्यता की पहचान है। यदि हम अपने धार्मिक प्रतीकों और ग्रंथों का सम्मान करेंगे, तभी हम दूसरों से भी अपने विश्वासों के सम्मान की अपेक्षा कर सकेंगे। इसलिए आवश्यकता इस बात की है कि सभी धार्मिक ग्रंथों के प्रति समान श्रद्धा और संवेदनशीलता रखी जाए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जाए।
“धर्म का सम्मान, राष्ट्र का सम्मान है; और पवित्र ग्रंथों का सम्मान, हमारी संस्कृति और संस्कारों का सम्मान है।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *