लखीमपुर: एक करोड़ के सोने के जेवरों पर पुलिस की कहानी पर कोर्ट सख्त, हाईकोर्ट जाने की तैयारी में पीड़ित परिवार
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां करीब 19 साल पुराने दहेज हत्या के मुकदमे में जब्त किए गए सोने के जेवरों को लेकर पुलिस की दलील ने सभी को चौंका दिया। पुलिस ने अदालत को बताया कि बारिश में जेवर खराब हो गए और जो बचे थे, उन्हें बंदर उठा ले गए।
यह मामला वर्ष 2007 का है। शहर के मोहल्ला कपूरथला निवासी मुदित अग्रवाल की पत्नी रानी अग्रवाल उर्फ जूली ने दिवाली की रात फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। पोस्टमॉर्टम के दौरान उनके शरीर से उतारे गए सोने के जेवर—नाक की कील, गले की चेन और लॉकेट, अंगूठी तथा 10 सोने की चूड़ियां—पुलिस के सुपुर्द कर सदर कोतवाली के मालखाने में जमा कराए गए थे।
मायके पक्ष की शिकायत पर दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ और मुदित अग्रवाल समेत कई लोगों को जेल भेजा गया। लंबी सुनवाई के बाद 28 फरवरी 2024 को अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया। इसके बाद मुदित अग्रवाल ने अदालत में आवेदन देकर जब्त जेवर वापस देने की मांग की।
इसी दौरान पुलिस की ओर से अदालत में दाखिल रिपोर्ट ने सबको हैरत में डाल दिया। पुलिस ने बताया कि 7 सितंबर 2013 तक की मालखाने की पोटलियों को सुखाने के लिए छत पर रखा गया था। बारिश में अधिकांश जेवर खराब होकर गल गए, जबकि कुछ पोटलियां बंदर उठाकर ले गए।
तत्कालीन सत्र न्यायाधीश लक्ष्मीकांत शुक्ल ने पुलिस के इस स्पष्टीकरण को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि सोने के जेवर बारिश में नष्ट नहीं हो सकते और मालखाने जैसी संवेदनशील जगह पर कीमती सामान को खुले में और बिना निगरानी के रखना गंभीर लापरवाही का प्रमाण है।
कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में यह भी कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि जेवरों का इस्तेमाल पुलिसकर्मियों ने अपने निजी हित में किया है। अदालत ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने और पीड़ित पक्ष को क्षतिपूर्ति दिलाने के निर्देश दिए थे।
हालांकि, एक वर्ष बीत जाने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने से पीड़ित परिवार अब न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहा है।

