एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर जो भ्रष्ट सिस्टम की भेंट चढ़ कर तड़प तड़प कर मर गया। या यूँ कहें कि मार दिया गया! आधी रात ऑफिस से नोएडा में घर लौट रहे उस 27 साल के इंजीनियर को भ्रष्ट और लापरवाह सिस्टम ने मार दिया!
सेक्टर-150 में शुक्रवार की रात एक 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर की दर्दनाक मौत हो गई। युवराज गुरुग्राम की एक कंपनी में जॉब करते थे. शुक्रवार की रात वह ऑफिस से घर ग्रेटर नोएडा आ रहे थे.
घना कोहरा था और विजिबिलिटी काफी कम होने के कारण वह एक मोड़ पर जहाँ प्रॉपर इंडिकेटर और बाउंड्री न होने के कारण युवराज की कार ले-ग्रैडियोज के पास अनियंत्रित होकर एक निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट परिसर में जा गिरी! जहां काफ़ी पानी भरा हुआ था। कार के पानी में गिरने के बाद युवराज ने बाहर निकलने की काफी कोशिश की, लेकिन वह कामयाब नहीं हो पाए!
युवराज मेहता 10 मिनट बाद करीब 12 बजकर 20 मिनट पर अपने पिता के मोबाइल फोन पर इसकी सूचना देते हैं। पिता के होश उड़ जाते हैं. बदहवास पिता तुरंत ही मदद के लिए डायल 112 पर फोन मिलाते हैं। 12:25 मिनट पर सूचना दर्ज हो जाती है.
इसके बाद रेस्क्यू की कोशिश शुरू होती है, लेकिन बेहद सुस्त रफ्तार से कंट्रोल रूप के प्रभारी के पास करीब 20 मिनट बाद 12:41 पर कॉल जाती है।
इस घटना के 50 मिनट बाद पुलिसफोर्स और दमकलकर्मी 12 बजकर 50 मिनट पर घटनास्थल पर पहुंच जाते हैं। चश्मीदीदों के मुताबिक युवराज पानी में धीरे धीरे डूब रही अपने कार के ऊपर मोबाइल टॉर्च जलाकर बचाओ बचाओ की गुहार लगा रहे थे।
रेस्क्यू टीम युवराज को तुरंत बाहर निकालने में नाकाम रहती है। डर और संसाधनों की कमी से युवराज तक मदद नहीं पहुंच पाती। मौके पर मौजूद बेबस पिता बेटे को डूबते देखते रहते हैं। रात 1 बजकर 15 मिनट पर SDRF की टीम भी पहुंचती है, लेकिन मदद के लिए पानी से भरे बेसमेंट में नहीं उतर पाती। 1:45 मिनट पर युवराज कार समेत पानी में डूब जाते हैं।
घटना के करीब दो घंटे बाद 2 बजे NDRF की टीम सर्च शुरू करती है। सुबह चार बजे युवराज को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया जाता है. तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। बताया जा रहा है कि जिस मॉल के गड्ढे में डूबने से युवराज की मौत हुई, उसे नोएडा प्राधिकरण ने अपने कब्जे में ले रखा था! लेकिन इसके बावजूद प्लॉट के आसपास कोई सेफ्टी वॉल नहीं बनाई गई थी और न ही प्रॉपर सुरक्षा के उपाय किये गए थे।
आखिरकार युवराज की पानी में डूबने से मौत हो गई!
युवराज के पिता राजकुमार मेहता का कहना है कि खतरनाक मोड़ होने के बावजूद वहां पुलिस ने बैरिकेडिंग नहीं की हुई थी और न ही रिफ्लेक्टर्स लगे हुए थे। इसी वजह से यह हादसा हुआ है। एक प्रतिभाशाली युवा, मेहता परिवार का चिराग इस निकम्मे, भ्रष्ट और लापरवाह सिस्टम की भेंट चढ़ गया!
21वीं सदी में हम चाँद और मंगल ग्रह तक पहुँच गए लेकिन नोएडा अथॉरिटी और प्रशासन के पास हज़ारों करोड़ का बजट होने के बावजूद एक भी ऐसा साधन- संसाधन नहीं था जिससे युवराज की जान बचायी जा सकती!

