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देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से शिष्टाचार भेंट

मुरादाबाद, 13 जनवरी 2026: आज मंगलवार को नगर निगम मुरादाबाद की पूरी टीम ने एक ऐतिहासिक और भावुक मुलाकात में देश के रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह जी से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान टीम ने निर्माणाधीन त्रिशूल रक्षा संग्रहालय के उद्घाटन के लिए निमंत्रण सौंपा। मुलाकात में महापौर विनोद अग्रवाल, कमिश्नर आंजनेय सिंह (IAS) और नगर आयुक्त दिव्यांशु पटेल (IAS) सहित पूरी टीम उपस्थित रही।

इस भेंट का सबसे रोचक और प्रेरणादायक पल तब आया जब कमिश्नर आंजनेय सिंह ने रक्षा मंत्री को बताया कि नगर आयुक्त दिव्यांशु पटेल ने संग्रहालय को समय पर पूरा करने के लिए एक अनोखा संकल्प लिया है – उद्घाटन तक दाढ़ी नहीं बनवाएंगे! इस पूरे समर्पण और जज्बे को सुनकर रक्षा मंत्री जी ने मुस्कुराते हुए इसकी जमकर सराहना की। साथ ही उन्होंने महापौर विनोद अग्रवाल से उद्घाटन वाले दिन एक नाई की व्यवस्था करने का मजाकिया अंदाज में निर्देश भी दिया। ये पल पूरे कमरे में हंसी और उत्साह की लहर लेकर आया!

टीम ने रक्षा मंत्री को और भी कई खास तोहफे सौंपे – दीपोत्सव के दौरान दिखाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के इलेक्ट्रॉनिक फ्रेम और नगर निगम का वार्षिक कैलेंडर। खासकर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ फ्रेम पर रक्षा मंत्री ने खास खुशी जताई। महापौर विनोद अग्रवाल ने नगर निगम द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न विकास और सांस्कृतिक प्रयासों की जानकारी दी, जबकि कमिश्नर आंजनेय सिंह ने त्रिशूल रक्षा संग्रहालय, संविधान वाटिका, हनुमान वाटिका और राणा सांगा स्मारक जैसे प्रोजेक्ट्स के साथ मुरादाबाद में चल रहे सांस्कृतिक

राष्ट्रवाद थीम वाले ऐतिहासिक कायाकल्प का विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। रक्षा मंत्री ने इस प्रयास की उच्च स्तरीय सराहना की और कहा कि इस पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा होनी चाहिए।
नगर आयुक्त दिव्यांशु पटेल ने संग्रहालय के महत्व को रेखांकित करते हुए 19 फरवरी को उद्घाटन का प्रस्ताव रखा। इस दिन छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती होने के कारण इसे और भी विशेष महत्व दिया गया है। रक्षा मंत्री ने इस तारीख पर सहर्ष सहमति जताई।

पूरी मुलाकात में नगर निगम मुरादाबाद की टीम के समर्पण, उत्साह और देशभक्ति से भरे जज्बे की रक्षा मंत्री ने खुले दिल से प्रशंसा की और सभी को ढेर सारी शुभकामनाएं दीं।
मुरादाबाद अब न सिर्फ पीतल नगरी के नाम से जाना जाएगा, बल्कि राष्ट्रवाद और सेना सम्मान के जीवंत केंद्र के रूप में भी उभरेगा। त्रिशूल रक्षा संग्रहालय का ये सफर अब तेजी से अपने चरम पर है – और इसके पीछे है एक टीम का ऐसा जुनून, जो दाढ़ी से भी बड़ा है।

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