आज मैं आप सभी के सामने केवल शब्द नहीं, अपने दिल का बोझ रख रहा हूँ।
यह कोई राजनीतिक वक्तव्य नहीं, बल्कि उस पीड़ा की आवाज़ है, जो लंबे समय से मुरादाबाद के व्यापारी भाइयों और आम जनता के मन में दबकर रह गई थी।
आज मुरादाबाद में जो कुछ भी हो रहा है—
रोडवेज क्षेत्र में रेलवे प्रशासन द्वारा की जा रही कठोर कार्यवाही, मंडी समिति में आढ़ती व्यापारी भाइयों का महीनों का संघर्ष और इससे पूर्व बुद्ध बाज़ार में अतिक्रमण के नाम पर उजड़े हुए व्यापार—
इन सबके बीच एक सवाल हर ज़ुबान पर है और हर दिल में गूंज रहा है।
क्या मुरादाबाद की पीड़ा देखने वाला सिर्फ एक ही जनप्रतिनिधि है?
क्या व्यापारी भाइयों का दर्द केवल माननीय विधायक श्री रितेश कुमार गुप्ता जी को ही दिखाई देता है?
बाकी जनप्रतिनिधि इस दुख की घड़ी में आखिर कहाँ हैं?
क्या मुरादाबाद की जनता ने वोट सिर्फ एक व्यक्ति को ही दिया था?
क्या जनता की आवाज़ सुनने, सड़क पर उतरकर संघर्ष करने और आँसू पोंछने के लिए इस शहर में केवल एक ही नेता बचा है?
आज मुरादाबाद की सम्मानित जनता सब कुछ देख रही है।
वह देख रही है कि कौन नेता एसी कमरों से नहीं, बल्कि सड़क पर बैठकर जनता के साथ खड़ा है, कौन कंधे से कंधा मिलाकर व्यापारी भाइयों के हक़ की लड़ाई लड़ रहा है,
और कौन सिर्फ बयानबाज़ी और मौन में सिमटकर रह गया है।
यह सच है कि माननीय विधायक श्री रितेश कुमार गुप्ता जी ने
हर संकट की घड़ी में अपनी जनता का हाथ थामा है।
उन्होंने यह नहीं पूछा कि राजनीतिक लाभ क्या होगा—
उन्होंने सिर्फ यह सोचा कि मेरी जनता सुरक्षित कैसे रहेगी।
अगर मुरादाबाद के सभी जनप्रतिनिधि मिलकर, निस्वार्थ भाव से, अपनी जनता के साथ खड़े हो जाते, तो शायद आज किसी व्यापारी की दुकान पर ताला नहीं लगता, किसी परिवार की रोज़ी-रोटी पर संकट नहीं आता।
लेकिन अफ़सोस…
यहाँ एकजुटता से ज़्यादा जलन दिखाई देती है, सहयोग से ज़्यादा उपेक्षा।
अब मुरादाबाद की जनता खामोश नहीं है।
वह हर दृश्य देख रही है, हर दर्द याद रख रही है।
वह जान चुकी है कि संकट में कौन साथ देता है और कौन सिर्फ सत्ता का सुख भोगता है।
2027 का चुनाव नज़दीक है।
और यह तय है कि मुरादाबाद के व्यापारी, मेहनतकश और सम्मानित नागरिक उसी का साथ देंगे, जो उनके दुख में सड़क पर बैठा, जो उनके आँसुओं में उनके साथ खड़ा रहा।
इसीलिए, पूरा विश्वास है कि मुरादाबाद की जनता एक बार फिर माननीय विधायक श्री रितेश कुमार गुप्ता जी को
भारी मतों से विजयी बनाकर विधानसभा भेजेगी।
क्योंकि
नेता वही होता है, जो सत्ता में नहीं—जनता के बीच रहता है।
और जनता कभी अपने सच्चे साथी को अकेला नहीं छोड़ती।
चंद्रभान सिंह पार्षद

