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UP POLICE का ‘टर्म इंश्योरेंस’ अध्याय!—महिला कांस्टेबल से अफेयर, पत्नी को जहर और 50 लाख का प्लान… आरोपी सिपाही कोर्ट में पेश

यूपी पुलिस जिन अपराधियों को कानून का पाठ पढ़ाती है, उन्हीं के बीच एक ऐसा सिपाही निकला जिसने खुद ही अपराध की ‘ट्यूशन’ शुरू कर दी। मामला गोरखपुर का है, जहां तैनात कांस्टेबल अष्टभुजा यादव पर आरोप है कि उसने पत्नी को रास्ते से हटाने के लिए पहले 50 लाख रुपए का टर्म इंश्योरेंस कराया, फिर कथित रूप से जहर देकर हत्या कर दी। वजह बताई जा रही है—विभाग में ही एक महिला कांस्टेबल से अवैध संबंध।

अफेयर, बीमा और फिर मौत… पुलिस चौकन्नी या शामिल?

पुलिस सूत्रों के मुताबिक पत्नी ने जब पति के संबंधों पर आपत्ति उठाई तो अष्टभुजा ने ‘पुलिसिया दिमाग’ का इस्तेमाल किया। पहले पत्नी के नाम एक मोटा बीमा—और फिर अचानक तबीयत बिगड़ना। बाद में फॉरेंसिक रिपोर्ट में सामने आया कि मौत जहर के कारण हुई, जिसके बाद हत्या की धाराएं लगाकर केस दर्ज हुआ।

‘कानून’ की शपथ और ‘कानून’ की हत्या

विडंबना यह कि जिस बल में वर्दी की इज़्ज़त, कर्तव्य और ईमानदारी की बातें रोज पढ़ाई जाती हैं, वहीं विभाग का एक जवान कानून को अपनी सुविधा के अनुसार मोड़ता रहा। महीनों तक फरार रहने के बाद आखिरकार आरोपी ने कोर्ट में पेश होकर सरेंडर कर दिया, जिससे पूरा मामला फिर सुर्खियों में आ गया।

विभाग की चुप्पी—सवाल गहरे!

पुलिस विभाग के लिए यह मामला सिर्फ हत्या नहीं बल्कि वर्दी पर उठता बड़ा सवाल है। क्या विभागीय निगरानी में ऐसे अफेयर और विवाद अंजाम तक पहुंचते रहें? क्या बीमा कंपनियां अब शादी में प्रीमियम कैलकुलेटर लेकर बैठें?

परिवार ने लगाई न्याय की गुहार

मृतका के परिजनों का आरोप है कि अष्टभुजा ने योजनाबद्ध तरीके से अपनी पत्नी को मौत के घाट उतारा। परिवार ने कड़ी कार्रवाई और कड़ी सजा की मांग की है। इधर, पुलिस जांच में बीमा से लेकर प्रेम प्रसंग तक सभी एंगल खंगाले जा रहे हैं।

वर्दी के गाल पर एक और थप्पड़

ये पहला मौका नहीं जब वर्दीधारी अपराध के कटघरे में खड़े नजर आए। लेकिन इस घटना ने एक और सवाल खड़ा कर दिया कि यदि आरोपी भी पुलिस में ही हो, तो भरोसा आखिर किस पर किया जाए?

UP POLICE की जिम्मेदारी अपराध रोकना है, पर जब अपराध की स्क्रिप्ट खुद विभाग के अंदर लिखी जाए—तब जनता किससे जवाब मांगे?

फिलहाल आरोपी सिपाही न्यायालय में पेश हो चुका है और आगे की सुनवाई चल रही है। परिवार को इंसाफ कब मिलेगा।

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