केरल की नर्स निमिषा प्रिया को यमन की अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। आज से ठीक 2 दिन बाद निमिषा की फांसी की तारीख निर्धारित की गई है। केंद्र सरकार ने निमिषा की फांसी रोकने का हर मुमकिन प्रयास किया, लेकिन सरकार को इसमें नाकामयाबी ही हाथ लगी।
निमिषा की फांसी पर अब केंद्र सरकार ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन हम जो कर सकते थे हमने किया। केंद्र सरकार के अनुसार, हर कोशिश की एक सीमा होती है। अब इससे ज्यादा हम क्या कर सकते हैं। निमिषा को बचाने का सिर्फ एक ही रास्ता है कि अगर मृतक शख्स का परिवार मुआवजा स्वीकार कर ले तो निमिषा की फांसी रुक सकती है।
केंद्र सरकार की तरफ से अटॉर्नी जनरल आर.वेंकटरमणी ने सुप्रीम कोर्ट में सरकार का पक्ष रखा। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ में सुनवाई के दौरान उन्होंने बताया कि मृतक के परिवार को 1 मिलियन डॉलर (लगभग 8.5 करोड़) रुपये के मुआवजे का ऑफर दिया गया था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया।

