जिस पेट्रोल से जनता की मदद के लिए दौड़नी थी PRV, उसी के तेल में कथित हेराफेरी का आरोप—जांच में भूमिका सामने आते ही SSP अनुराग आर्य ने दिखाई सख्ती
बरेली। जनता की सुरक्षा के लिए 24 घंटे सड़क पर दौड़ने वाली डायल-112 की सरकारी गाड़ी ही कथित तेल के खेल का हिस्सा बन गई। बरेली में PRV के पेट्रोल में हेराफेरी और उसे कथित तौर पर बेचने का मामला सामने आने से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
मामला PRV संख्या 6854 का बताया जा रहा है। आरोप है कि इस वाहन पर तैनात हेड कांस्टेबल ब्रजेश कुमार और कांस्टेबल मोन्टी कुमार ने पेट्रोल पंप संचालकों से कथित मिलीभगत कर सरकारी वाहन के पेट्रोल का फर्जी हिसाब-किताब तैयार किया। आरोप यह भी है कि वाहन के निर्धारित कोटे से पेट्रोल निकालकर उसे कथित तौर पर खुले बाजार में बेच दिया जाता था।
सरकारी ईंधन में कथित सेंधमारी की भनक अधिकारियों को लगी तो मामले की गोपनीय जांच शुरू कराई गई। जांच में दोनों पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाए जाने के बाद SSP अनुराग आर्य ने दोनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। साथ ही विभागीय जांच के आदेश भी जारी किए गए हैं।
होमगार्ड की भूमिका ने बढ़ाई सनसनी
मामले की जांच में होमगार्ड मुकेश शर्मा का नाम भी सामने आने की बात कही गई है। होमगार्ड विभाग अलग होने के कारण उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए जिला कमांडेंट होमगार्ड, बरेली को पत्र भेजा गया है।
कितने समय से चल रहा था कथित तेल का खेल?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकारी पेट्रोल में यह कथित हेराफेरी कब से चल रही थी? सरकारी खजाने को कितना नुकसान पहुंचा और इस पूरे मामले में क्या सिर्फ दो पुलिसकर्मी ही शामिल थे या फिर पेट्रोल पंप संचालकों समेत अन्य लोगों की भी भूमिका थी?
फिलहाल विभागीय जांच इन सवालों के जवाब तलाश रही है। जांच के अंतिम निष्कर्ष के आधार पर आगे की विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी संसाधन जनता की सेवा के लिए हैं, निजी कमाई का जरिया बनाने के आरोप सामने आना अपने आप में पुलिस व्यवस्था के लिए गंभीर सवाल खड़े करता है।

