जयपुर। जयपुर नगर निगम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मुस्लिम बहुल और कांग्रेस के प्रभाव वाले वार्डों में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट देकर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रयोग किया। पार्टी ने कुल 8 मुस्लिम चेहरों को टिकट दिया था, लेकिन इनमें से एक उम्मीदवार नामांकन दाखिल नहीं कर सकीं। मैदान में उतरे शेष 7 उम्मीदवारों में से कोई भी जीत दर्ज नहीं कर सका।
चुनावी नतीजों में कहीं BJP प्रत्याशियों को कांग्रेस उम्मीदवारों ने मात दी, तो कुछ वार्डों में निर्दलीय मुस्लिम प्रत्याशी भी BJP उम्मीदवारों से आगे रहे। इससे मुस्लिम बहुल इलाकों में BJP की रणनीति को अपेक्षित चुनावी सफलता नहीं मिल सकी।
हालांकि, पूरे जयपुर नगर निगम क्षेत्र में BJP का प्रदर्शन मजबूत रहा और पार्टी ने बहुमत हासिल किया। ऐसे में चुनाव परिणाम ने एक दिलचस्प तस्वीर सामने रखी—एक ओर BJP ने नगर निगम में बहुमत हासिल किया, वहीं मुस्लिम मतदाताओं के बीच पैठ बनाने के लिए टिकट वितरण का उसका चर्चित प्रयोग किसी सीट को जीत में तब्दील नहीं कर सका।
राजनीतिक विश्लेषण के लिहाज से यह परिणाम इस बात को रेखांकित करता है कि किसी समुदाय से उम्मीदवार उतारना और उस समुदाय के मतदाताओं का समर्थन हासिल करना दो अलग-अलग चुनावी समीकरण हैं।

