नई दिल्ली। दिल्ली सरकार एक ओर इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने और इस क्षेत्र में लगभग 15,000 करोड़ रुपये खर्च करने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में सरकारी इलेक्ट्रिक वाहन निगम की पार्किंग में लंबे समय से खड़े होकर धूल फांकते दिखाई दे रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, कई सरकारी ईवी गाड़ियों का नियमित उपयोग नहीं हो रहा है। ये वाहन पार्किंग स्थलों पर खड़े-खड़े धूल खा रहे हैं, जिससे सरकार की इलेक्ट्रिक वाहन नीति और संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर सवाल उठने लगे हैं।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि इन वाहनों की खरीद पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं, तो उनका संचालन क्यों नहीं हो रहा? क्या इनके लिए पर्याप्त चालक उपलब्ध नहीं हैं, चार्जिंग व्यवस्था में कोई समस्या है, या फिर प्रशासनिक लापरवाही के कारण ये वाहन उपयोग से बाहर पड़े हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक धन से खरीदे गए वाहनों का समय पर और उचित उपयोग होना चाहिए। यदि वाहन निष्क्रिय पड़े रहते हैं, तो इससे सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग होने के साथ-साथ इलेक्ट्रिक वाहन नीति के उद्देश्यों पर भी प्रश्नचिह्न लगते हैं।
अब आवश्यकता है कि संबंधित विभाग इस पूरे मामले की जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करे और यह स्पष्ट करे कि निगम की पार्किंग में बड़ी संख्या में सरकारी ईवी गाड़ियाँ आखिर धूल क्यों खा रही हैं।

