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दृष्टिबाधित फरियादी से अभद्रता, वीडियो वायरल होने पर कोतवाल-दरोगा निलंबित


शिकायत दर्ज कराने पहुंचे पीड़ित को थाने से धक्का देकर निकाला, सोशल मीडिया पर वीडियो फैलते ही पुलिस हरकत में आई


बदायूं। उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले की बिसौली कोतवाली में एक दृष्टिबाधित फरियादी के साथ कथित अभद्रता का मामला सामने आया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए कोतवाली प्रभारी निरीक्षक राजेंद्र सिंह पुंडीर और दरोगा भूपेंद्र यादव को निलंबित कर दिया है।


रिपोर्ट दर्ज न होने पर थाने पहुंचे थे पीड़ित


जानकारी के अनुसार, वजीरगंज थाना क्षेत्र के नौली हरनाथपुर गांव निवासी दृष्टिबाधित मोरपाल अपने भतीजे के सड़क हादसे के मामले में रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए कई दिनों से पुलिस के चक्कर लगा रहे थे। आरोप है कि पुलिस लगातार उनकी शिकायत दर्ज करने में टालमटोल कर रही थी।
न्याय न मिलने पर जब मोरपाल दोबारा बिसौली कोतवाली पहुंचे, तो उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और उन्हें थाने से बाहर निकाल दिया गया।
वायरल वीडियो में दिखी पूरी घटना
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में कथित तौर पर देखा जा सकता है कि कोतवाल राजेंद्र सिंह पुंडीर फरियादी से तीखी बहस करते हैं और अपशब्द कहते हुए कुर्सी से उठकर उन्हें धक्का देते हुए बाहर जाने को कहते हैं। मौके पर मौजूद दरोगा भूपेंद्र यादव पर भी पीड़ित के साथ दुर्व्यवहार करने के आरोप लगे हैं।
पहले भी की थी शिकायत, नहीं हुई कार्रवाई
पीड़ित ने बताया कि उसने इस मामले की शिकायत पहले मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी दर्ज कराई थी, लेकिन उस समय कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। वीडियो सामने आने के बाद मामला तूल पकड़ गया और पुलिस प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करनी पड़ी।
वीडियो सामने आते ही दोनों अधिकारी निलंबित
मामले के संज्ञान में आते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने जांच के आदेश दिए और प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाने पर प्रभारी निरीक्षक राजेंद्र सिंह पुंडीर और दरोगा भूपेंद्र यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
जांच जारी, आगे हो सकती है विभागीय कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पूरे प्रकरण की विभागीय जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई तय की जाएगी।
पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल
इस घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली और संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर जब पीड़ित एक दृष्टिबाधित व्यक्ति हो, तब इस तरह के व्यवहार को लेकर आम लोगों में नाराजगी देखी जा रही है।

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