मुंबई से एक बेहद अनोखा और भावुक कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां पति-पत्नी के बीच तलाक का विवाद अब अदालत तक पहुंच गया है। इस मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पति ने तलाक देने से पहले पत्नी के सामने अपनी दान की हुई किडनी वापस करने की शर्त रख दी है।
जानकारी के मुताबिक, कुछ साल पहले महिला गंभीर रूप से बीमार हो गई थी और उसकी किडनी फेल हो चुकी थी। डॉक्टरों ने ट्रांसप्लांट ही एकमात्र उपाय बताया था। ऐसे में पति ने अपनी एक किडनी दान कर पत्नी की जान बचाई थी। ऑपरेशन के बाद महिला की हालत में सुधार हुआ और वह सामान्य जीवन जीने लगी।
समय बीतने के साथ पति-पत्नी के रिश्तों में खटास बढ़ती गई और मामला इतना बिगड़ गया कि पत्नी ने कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल कर दी। पत्नी के इस फैसले से आहत पति ने अदालत में कहा कि जब उसने अपनी जान जोखिम में डालकर पत्नी को जीवनदान दिया था, तो अब तलाक से पहले पत्नी को उसकी किडनी वापस करनी चाहिए।
पति का तर्क है कि उसने यह कदम अपने रिश्ते और परिवार को बचाने के लिए उठाया था, लेकिन अब जब पत्नी ही रिश्ता खत्म करना चाहती है, तो उसे कम से कम उसके त्याग का सम्मान करना चाहिए। वहीं महिला का कहना है कि अंगदान एक मानवीय और कानूनी प्रक्रिया है, जिसे वापस लेना संभव नहीं है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, एक बार अंग प्रत्यारोपण हो जाने के बाद वह अंग कानूनी रूप से रिसीवर का हिस्सा माना जाता है और उसे वापस लेना न तो चिकित्सकीय रूप से संभव है और न ही कानून इसकी अनुमति देता है।
यह मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी तीखी बहस छिड़ गई है। कुछ लोग पति के त्याग को देखते हुए उसकी भावनाओं के साथ खड़े हैं, जबकि कई लोग इसे अव्यावहारिक और कानून के खिलाफ बता रहे हैं। अब सबकी नजर अदालत के फैसले पर टिकी है कि आखिर इस संवेदनशील मामले में न्याय किसके पक्ष में जाता है।

