
सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें यह दावा किया जा रहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व विधायक संगीत सोम से पीछे हटने को कहा और किसी मंत्री को आगे आने का संकेत दिया। इस वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं और बहसें शुरू हो गई हैं। कोई इसे सत्ता के भीतर का संदेश बता रहा है तो कोई इसे चुनावी रणनीति का हिस्सा मान रहा है।
लेकिन असली सवाल यह है कि क्या किसी उम्मीदवार को सिर्फ इसलिए वोट दिया जाना चाहिए कि वह मुख्यमंत्री या सत्ता के करीब है? या फिर वोट का असली आधार विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और जनता की मूलभूत जरूरतें होनी चाहिए?
दुर्भाग्य की बात यह है कि आज सोशल मीडिया पर “कौन किसका करीबी है” इसी को लेकर इतना शोर मचाया जा रहा है कि असली मुद्दे पीछे छूटते जा रहे हैं। कुछ लोग तो इस वर्चस्व की राजनीति में दिन-रात लगे हुए हैं, मानो यही जनता का भविष्य तय करेगा।
इसी बीच यह भी सच है कि अतुल प्रधान 2022 में सरधना से विधायक चुने गए थे। सत्ता में न होने के बावजूद उनका अब तक का कार्यकाल क्षेत्र में सक्रियता, जनसंपर्क और जनता के मुद्दों को उठाने के लिहाज से काफी सराहनीय माना जा रहा है।
अब सवाल सीधा जनता से है—
आगामी विधानसभा चुनाव में आप किसे अपना विधायक बनाना चाहेंगे?
किसी “सत्ता के करीबी” को, या उस व्यक्ति को जो आपके क्षेत्र के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के लिए ईमानदारी से काम करता हो?
फैसला जनता को करना है। लोकतंत्र में असली ताकत किसी की नजदीकी नहीं, बल्कि जनता का विश्वास होता है।
