• Fri. Feb 20th, 2026

सिविल जज भर्ती के लिए 3 साल की प्रैक्टिस की अनिवार्यता खत्म, MP हाईकोर्ट का आदेश रद्द

सिविल जज भर्ती के लिए 3 साल की प्रैक्टिस की अनिवार्यता खत्म, MP हाईकोर्ट का आदेश रद्द

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ ने संशोधित नियमों के तहत पात्रता मानदंडों को पूरा नहीं करने वाले उम्मीदवारों को बाहर करने का निर्देश था.

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा पारित उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सिविल जज के पदों पर भर्ती के लिए तीन साल की लीगल प्रैक्टिस अनिवार्य कर दी गई थी. जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने मंगलवार को यह फैसला सुनाया.

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ओर से अधिवक्ता अश्विनी कुमार दुबे ने पीठ के समक्ष तर्क दिया कि दोबारा परीक्षा कराना “असंवैधानिक और अव्यावहारिक” है. दुबे ने जोर देकर कहा कि इससे मुकदमेबाजी का सिलसिला शुरू हो जाएगा. आवेदनों पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट द्वारा अपनी खंडपीठ के फैसले को चुनौती देने वाली अपील को स्वीकार कर लिया.

सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा 13 जून, 2024 को अपनी खंडपीठ द्वारा पारित उस आदेश के खिलाफ दायर अपील पर पारित किया, जिसमें उसे 14 जनवरी, 2024 को आयोजित प्रारंभिक परीक्षा में उन सभी सफल उम्मीदवारों को छांटने या बाहर करने का निर्देश दिया गया था, जो संशोधित नियमों के तहत पात्रता मानदंडों को पूरा नहीं करते थे.

पिछले साल, सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें तीन साल की लीगल प्रैक्टिस की अनिवार्य आवश्यकता के बिना सिविल जजों के पदों पर भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई थी.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *