हल्द्वानी। पंचायत चुनाव में 80 प्रतिशत दिव्यांग शिक्षक की ड्यूटी लगा दी गई। उन्हें एक रात पहले प्रशिक्षण के लिए हल्द्वानी पहुंचने का फरमान सुना दिया गया। ओखलकांडा के गांव से 145 किमी सफर करने बाद बैसाखी के सहारे सेसुबह जब दिव्यांग शिक्षक प्रशिक्षण में दाखिल हुए तो उन्हें देखकर अफसरों के होश उड़ गए। तुरंत दिव्यांग शिक्षक को लौटा दिया। इस दृश्य ने पूरे चुनाव प्रबंधन तंत्र की संवेदनहीनता को बेनकाब कर दिया।
सुबह 10 बजे मेडिकल कॉलेज सभागार के बाहर कार्मिकों के चुनाव प्रशिक्षण को लेकर हलचल थी। यहां गेट पर एक टैक्सी वाहन रुका और उसमें से एक दिव्यांग उतरा। बैसाखी के सहारे प्रशिक्षण स्थल की तरफ बढ़ते व्यक्ति पर हर किसी की नजरें टिक गईं। व्यक्ति सीधे उस डेस्क पर पहुंचा, जहां कार्मिक अपनी आमद दर्ज करा रहे थे। बोले, ‘मेरा नाम गिरीश चंद्र आर्या है। मैं सुदूर गांव कांडा पसिया में शिक्षक हूं। चुनाव ड्यूटी के लिए मुझे बुलाया है।’ वहां तैनात कार्मिक चौंका और बोला, अरे आपको किसने यहां भेज दिया। कर्मचारी ने अधिकारियों को सूचित किया। सभी नाराजगी जाहिर करने लगे कि कैसे इतनी बड़ी चूक हो गई। माहौल गर्माता देख तुरंत कुछ अधिकारी पहुंचे और दिव्यांग शिक्षक को ससम्मान लौटा दिया।
दिव्यांग हूं कहा, पर नहीं सुनी गई फरियाद
शिक्षक गिरीश ने बताया कि उनके पास 80 फीसदी दिव्यांगता का प्रमाण पत्र है, जो 2020 से विभाग में जमा है। गुरुवार रात आठ उन्हें कॉल आई कि शुक्रवार सुबह हल्द्वानी पहुंचना है। उन्होंने बताया भी कि वह दिव्यांग हैं, लेकिन उनकी नहीं सुनी गई। सुबह छह बजे वह ग्रामीण रूट की टैक्सी से हल्द्वानी के लिए निकले थे।
बीमार और दिव्यांग की ड्यूटी लगाना न केवल अन्याय है, बल्कि मानवता के भी खिलाफ अपराध है। ये बड़ी चूक है। हमनिंदा करते हैं और तत्काल सुधार की मांग करते हैं। -गिरीश जोशी, जिलाध्यक्ष, राजकीय शिक्षक संघ
जब सूची बनी होगी, तब उसमें शिक्षक के दिव्यांग होने का जिक्र नहीं रहा होगा। इस कारण ड्यूटी लग गई। किसी भी स्थिति में चुनाव ड्यूटी में नहीं भेज जाएगा। -गोविंद जायसवाल, नोडल अधिकारी कार्मिक एवं सीईओ, नैनीताल
गिरीश चंद्र आर्या ने बताया कि उनका स्कूल हल्द्वानी से 145 किमी दूर है, वहीं उनका गांव है। प्रशिक्षण से तो उन्हें लौटा दिया गया, लेकिन आने-जाने में 300 किमी की फजीहत हो जाएगी। बताया कि 2019 में कैंसर के कारण उन्हें अपना दायां पैर गंवाना पड़ा था।
आने-जाने में 300 किमी की फजीहत: शिक्षक

