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पति की जागीर नहीं है पत्नी! इलाहाबाद हाई कोर्ट

उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट का बड़ा फैसला पति था पत्नी के रिश्ते को लेकर आया है। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट का यह बड़ा फैसला पति तथा पत्नी के रिश्ते को नए ढंग से परिभाषित करने वाला है। बृहस्पतिवार को दिए गए हाईकोर्ट के इस बड़े फैसले से पहले पति तथा पत्नी के रिश्ते को लेकर बुधवार को भी उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट का बड़ा फैसला आया था। पति तथा पत्नी के रिश्ते को लेकर उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट के दोनों फैसले हम आपको बता रहे हैं।

क्या है उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट का बड़ा फैसला?
उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट (इलाहाबाद कोर्ट) ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। बड़ा फैसला सुनाते हुए उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट के जज ने साफ-साफ कहा है कि पत्नी अपने पति की जागीर नहीं होती है। पुरुष समाज को गुलाम बनाने वाली मानसिकता से बाहर निकलना ही पड़ेगा। दरअसल उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने पत्नी के अंतरंग वीडियो वायरल करने के आरोपी युवक की याचिका खारिज कर दी। कहा कि पत्नी जागीर नहीं है, पति विक्टोरियन युग की मानसिकता त्याग दें। अब दौर बदल गया है, पत्नी का शरीर, उसकी गोपनीयता और उसके अधिकार अपने हैं पति उनका मालिक नहीं है।

यह टिप्पणी न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने मिर्जापुर निवासी बृजेश यादव की ओर से जिला अदालत में लंबित आपराधिक कार्यवाही को चुनौती देने वाली याचिका पर दिया है। मामला मिर्जापुर की चुनार कोतवाली थाना क्षेत्र का है। रोशनहर अहरौरा निवासी बृजेश यादव की शादी रामपुर कोलना में हुई थी। 09 जुलाई 2023 को पत्नी ने बृजेश के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। आरोप लगाया कि उसने मुकदमेबाजी की रंजिश में उसके अंतरंग वीडियो वायरल कर दिए हैं। इससे उसकी प्रतिष्ठा को आघात पहुंचा है। पुलिस ने विवेचना के बाद पति के खिलाफ ट्रायल कोर्ट में आईटी एक्ट की धाराओं में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। कोर्ट ने समन जारी कर पति को तलब किया। इसके खिलाफ पति ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
पति से लम्बे समय तक अलग रहना पत्नी की क्रूरता है
इससे पहले बुधवार को भी उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया था। अपना बड़ा फैसला सुनाते हुए उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने कहा कि पति से लंबे समय तक अलग रहना, संबंध न बनाना व विवाह को बचाने के लिए कोई कानूनी प्रयास न करना क्रूरता है। यह टिप्पणी कर कोर्ट ने गाजीपुर के पारिवारिक न्यायालय की तलाक अर्जी खारिज करने का आदेश रद्द कर दिया। यह आदेश उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह व न्यायमूर्ति डी. रमेश की खंडपीठ ने महेंद्र प्रसाद की याचिका पर दिया।

गाजीपुर निवासी महेंद्र प्रसाद की शादी 26 फरवरी 1990 को हुई थी। महेंद्र इंजीनियर थे और उनकी पत्नी सरकारी विद्यालय में शिक्षक थीं। कुछ विवाद के चलते दोनों अलग-अलग रहने लगे। इसके बाद पति ने तलाक अर्जी दाखिल की, जिसे पारिवारिक न्यायालय रद्द कर दिया। इसे चुनौती देते हुए महेंद्र ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की। कोई कहा कि शादी के 35 वर्षों में पति-पत्नी बमुश्किल कुछ वर्षों तक ही साथ रहे हैं। पत्नी ने स्वयं अपने पति संग रहने से इंंकार कर दिया है। प्रतिवादी पत्नी केवल अपनी शादी को कानूनी रूप से जीवित रखना चाहती है। 23 साल से दोनों अलग हैं। पत्नी ने वैवाहिक रिश्ते को पुनर्जीवित करने का कोई प्रयास नहीं किया और न ही कभी संबंध बनाया। यह क्रूरता है।

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