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कंधार हाईजैक प्लेन की वो डॉक्टर पैसेंजर – क्या कहती है नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज की कंट्रोवर्सी पर 

आज से लगभग 25 साल पहले 1999 में काठमांडू से दिल्ली आ रहे प्लेन को जब आतंकवादियों ने हाईजैक करके कंधार में उतारा था तो उसमें सैकड़ो लोग सवार थे इस पूरे ऑपरेशन को लेकर कई बार मूवी बन चुकी है लेकिन इस बार नेटफ्लिक्स की एक सीरीज पर विवाद खड़ा हो गया है आई सी 814  कंधार हाईजैक पर बनी मूवी में आतंकवादियों के नाम हिंदुओं के नाम पर दिए जाने से कई संगठन नाराज हैं इतना ही नहीं यह मामला कोर्ट तक पहुंच गया है इस प्लेन में वैसे तो 170 से अधिक लोग सफर कर रहे थे लेकिन इन सभी लोगों में से एक ऐसी महिला थी जिन्होंने न केवल आतंकवादियों को ललकारा था बल्कि आतंकवादियों ने भी उनकी उसे वक्त सहायता ली थी जब कुछ पैसेंजर की तबीयत खराब होने लगी थी देहरादून की रहने वाली अनिता जोशी आज भी उस दिन को याद करके परेशान सी हो जाती हैं नेटफ्लिक्स पर आई फिल्म को लेकर वह क्या सोचती हैं आईए जानते हैं.
क्या सही में थे आतंकियों के भोला,शंकर नाम 

फिल्म में दिखाया गया है कि आतंकवादी एक दूसरे को चीफ, भोला,शंकर,बर्गर,और डाक्टर कहकर संबोधित कर रहे थे और इसी नाम से मूवी में आतंकवादियों को दिखाया गया है अनिता कहती हैं हां यह सही बात है कि आतंकवादी एक दूसरे को इन्हीं नाम से पुकार रहे थे लेकिन हम भारतीय हैं और हमें सभी की भावनाओं का ख्याल रखना चाहिए इसलिए जिस किसी ने भी इस वेब सीरीज को बनाया है उन्हें इस बात का ध्यान रखना चाहिए था कि आतंकवादियों ने जानबूझकर अपने नाम हिंदुओं से जोड़कर लिखे थे लेकिन अब इस तरह से उसको नाइट रूपांतर करना सही नहीं है अच्छा होता कि आतंकवादियों को उनके असली नाम से ही पुकारा जाता अनिता कहती हैं कि उन्हें भी बिल्कुल अच्छा नहीं लगा जब मूवी में भोला और शंकर जैसे नाम से आतंकवादियों को पुकारा जा रहा था और वह इस बात का विरोध भी करती हैं.

जब हम हाईजैक हो गए 

कंधार हाईजैक की यादों को याद करते हुए डॉक्टर अनिता कहती है कि उत्तराखंड से उस प्लेन में लगभग 8 से 10 लोग शामिल थे उनमें से एक में और उत्तराखंड के मुख्य सचिव रहे टोलिया जी की पत्नी भी थी हमें इस बात का अंदाजा नहीं था कि क्या हो रहा है प्लेन जब काठमांडू से उड़ा और 10 मिनट भी नहीं हुए थे कि अचानक से दो लोग अंदर आते हैं और वह कहते हैं कि आप लोग चुपचाप बैठे रहे इस प्लान को हाईजैक कर लिया गया है हम इस बात को मजाक समझ रहे थे और हमने इस बात को नजर अंदाज किया अमूमन हर पैसेंजर का यही हाल था लेकिन जब उन्होंने बार-बार कहा और हमें धमकी दी तब हमें पता लगा कि हम किसी बड़ी मुसीबत में फंस गए हैं इसके बाद पूरे प्लेन में चिल्लाने रोने की आवाज सुनाई देने लगी हम कुछ समझ नहीं रहते कि आखिरकार यह हो कह रहा है हमारे प्लेन को पहले अमृतसर फिर लाहौर और फिर अन्य जगहों पर उतरने की बात की जा रही थी फिर प्लेन दुबई में उतारा गया और उसमें तेल डलवाया गया यहीं पर कुछ लोगों को छोड़ा भी गया था उनमें से एक कत्याल भी थे जिनको आतंकवादियों ने घायल कर दिया था आतंकवादियों को यह पता लग गया था कि मैं डॉक्टर हूं ऐसे में उन्होंने उनकी ड्रेसिंग के लिए मुझे बुलाया और मैं उनकी ड्रेसिंग की लेकिन उनके शव को आतंकवादियों ने दुबई में ही छोड़ दिया उनकी पत्नी बार-बार मुझे यह पूछ रही थी कि आखिरकार उनकी तबीयत कैसी है मैं उनकी हालत को इस बात से पहचान सकती थी क्योंकि 1 साल पहले मैं भी इसी पीड़ा से गुजरी थी.

डॉक्टर अंकिता कहती हैं की बाद में जब हम आजाद हुए तब हमें पता लगा कि जो आतंकवादी अपने आप को कश्मीरी हिंदू बता रहे थे वह दरअसल अफगानिस्तान के पाकिस्तान के आतंकवादी थे उनके नाम हमें बाद में सार्वजनिक तौर पर पता लगे और यह पता लगा कि वह नाम जो एक दूसरे को संबोधित कहने के लिए बोल रहे थे वह नाम नकली थे.

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