वर्दी की जिम्मेदारियों के बीच परिवार के लिए भी मिला वक्त, छह साल में पहली बार घर पर करवाचौथ मनाएंगी महिला कांस्टेबल
फतेहपुर, उत्तर प्रदेश। करवाचौथ पर जहां देशभर में महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के लिए निर्जला व्रत रख रही हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले से पुलिस विभाग का एक सराहनीय फैसला सामने आया है। जिले के पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक ने करवाचौथ का व्रत रखने की इच्छुक करीब 700 महिला पुलिसकर्मियों को त्योहार मनाने के लिए छुट्टी देने का निर्णय लिया है। उनके इस फैसले की खूब सराहना हो रही है।
23 थानों और 40 चौकियों पर तैनात हैं महिला पुलिसकर्मी
फतेहपुर जिले में कांस्टेबल से लेकर सब-इंस्पेक्टर रैंक तक की महिला पुलिसकर्मी 23 थानों और 40 पुलिस चौकियों पर तैनात हैं। ड्यूटी की व्यस्तता के चलते अक्सर इन महिला पुलिसकर्मियों को त्योहारों पर भी परिवार के साथ समय बिताने का अवसर नहीं मिल पाता। इसे ध्यान में रखते हुए एसपी ने थाना प्रभारियों से उन महिला पुलिसकर्मियों की सूची मांगी थी, जो करवाचौथ का व्रत रखना चाहती हैं।
एसपी ने कानून-व्यवस्था और पुलिसिंग प्रभावित न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए हैं। यानी ड्यूटी की जिम्मेदारी निभाने के साथ महिला पुलिसकर्मियों की पारिवारिक भावनाओं का भी ध्यान रखा गया है।
छह साल की नौकरी में पहली बार घर पर रखेंगी व्रत
छुट्टी मिलने से महिला पुलिसकर्मियों के चेहरों पर खुशी साफ नजर आ रही है। महिला कांस्टेबल कुमारी ने बताया कि छह साल के सेवाकाल में यह पहला मौका है, जब वह करवाचौथ पर घर में रहकर व्रत रख सकेंगी। उन्होंने इसे अपने लिए किसी लग्जरी से कम नहीं बताया। त्योहार की तैयारियों के तहत उन्होंने दोनों हाथों में मेहंदी भी लगवाई है।
वहीं, महिला कांस्टेबल अमृता सिंह ने कहा कि पुलिस की नौकरी काफी चुनौतीपूर्ण होती है और परिवार के साथ समय बिताने के मौके बहुत कम मिलते हैं। करवाचौथ पर छुट्टी मिलने से वह इस त्योहार को अच्छी तरह मना सकेंगी।
वर्दी के साथ भावनाओं का भी सम्मान
पुलिस की नौकरी में अनुशासन, ड्यूटी और जनसेवा सर्वोपरि हैं, लेकिन इसके पीछे काम करने वाले पुलिसकर्मी भी एक परिवार का हिस्सा हैं। फतेहपुर एसपी का यह फैसला इसी मानवीय सोच को दर्शाता है। कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने वाली महिला पुलिसकर्मियों को अपने परिवार और परंपराओं के साथ समय बिताने का अवसर देना निश्चित रूप से एक सकारात्मक पहल है।
संदेश साफ है—पुलिसकर्मी भी इंसान हैं, उनकी भावनाओं और पारिवारिक खुशियों का सम्मान भी उतना ही जरूरी है।