बिजनौर। सड़क पर बरती गई थोड़ी-सी सावधानी किसी परिवार का चिराग बुझने से बचा सकती है, जबकि चंद सेकेंड की जल्दबाजी जिंदगी भर का गम दे सकती है। आज सड़क हादसे केवल आंकड़े नहीं, बल्कि हंसते-खेलते परिवारों की बर्बादी की वजह बन चुके हैं। बिजनौर के वरिष्ठ पत्रकार आदिल इरफान ने जिले की जनता से अपील करते हुए कहा कि सड़क पर अनुशासन बनाए रखना केवल कानून का डर नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक व नैतिक जिम्मेदारी है। ”यातायात नियम चालान से बचने के लिए नहीं, बल्कि आपकी और आपके अपनों की सांसें सलामत रखने के लिए बनाए गए हैं।
याद रखिए, घर पर कोई आपका इंतजार कर रहा है।” — आदिल इरफान
आदिल इरफान का बिजनौर की जनता को मुख्य संदेश 1. जीवन सुरक्षा: हेलमेट और सीट बेल्ट को बोझ न समझें चालक व सवार दोनों के लिए दोपहिया वाहन पर चालक के साथ पीछे बैठने वाले को भी हेलमेट जरूर पहनना चाहिए। दूरी कोई बहाना नहीं: “पास में ही तो जाना है” की सोच जानलेवा साबित होती है। दुर्घटना दूरी देखकर नहीं आती। कार में सीट बेल्ट का प्रयोग: कार में बैठे सभी यात्रियों का सीट बेल्ट लगाना उतना ही जरूरी है जितना चालक का। 2. स्पीड और भटकाव से दूरी: “नजर हटी, दुर्घटना घटी” मोबाइल फोन का इस्तेमाल बंद करें: ड्राइविंग के दौरान फोन पर बात करना, टेक्स्ट करना या रील्स देखना सीधे मौत को दावत देना है। रफ्तार पर ब्रेक लगाएं: तय गति सीमा से तेज वाहन न चलाएं। ‘जल्दी पहुंचने से ज्यादा जरूरी है सुरक्षित पहुंचना’। नशे में ड्राइविंग अपराध भी, पाप भी: शराब या अन्य पदार्थों के प्रभाव में वाहन चलाना खुद और सड़क पर चल रहे अन्य मासूमों की जिंदगी से खिलवाड़ है। 3. अभिभावकों की जिम्मेदारी: नाबालिगों को न दें चाबी अपने नाबालिग बच्चों को शौक या लाड़-प्यार में वाहन न चलाने दें। बच्चों में यातायात नियमों के प्रति सम्मान की भावना बचपन से ही विकसित करें। 4. चालान परेशानी नहीं, सुरक्षा की याददाश्त है पुलिस और प्रशासन का मकसद आपको परेशान करना नहीं, बल्कि सुरक्षित घर पहुंचाना है। यदि जनता खुद जागरूक हो जाए, तो सख्त कार्रवाइयों और पुलिस के डर की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
सड़क हादसे के वक्त तमाशा नहीं, इंसानियत दिखाएं
आदिल इरफान ने सड़क हादसों के बाद लोगों के बदलते रवैये पर गहरा दुख जताते हुए कुछ सख्त बातें कहीं: रील्स और वीडियो न बनाएं: दुर्घटनास्थल पर मोबाइल से फोटो या वीडियो बनाकर तमाशा न देखें। आपका वह 1 मिनट किसी की जान बचा सकता है। ’गोल्डन आवर’ में मदद करें: दुर्घटना के तुरंत बाद 108/112 पर सूचना दें और संभव हो तो घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने में मदद करें। पुलिस या कोर्ट का डर छोड़ें: केंद्र सरकार की ‘गुड समैरिटन’ (नेक मददगार) नीति के तहत घायलों की मदद करने वालों को कानूनी पचड़ों या पुलिस पूछताछ से पूर्ण संरक्षण प्राप्त है।
सड़क सुरक्षा को बिजनौर में बनाएं जन-आंदोलन
आदिल इरफान ने कहा कि यातायात व्यवस्था सिर्फ सरकार या पुलिस के भरोसे नहीं सुधर सकती। इसके लिए: स्कूलों की भूमिका: बच्चों को छोटी उम्र से ही ट्रैफिक सिग्नल्स, जेब्रा क्रॉसिंग और नियमों का पाठ पढ़ाया जाए। सक्रिय नागरिकता: सड़क पर कहीं खतरनाक मोड़, टूटा बोर्ड या गड्ढा दिखे तो संबंधित प्रशासन को तुरंत सूचित करें। कमजोर चालकों का ध्यान: सड़क किसी एक की नहीं है। पैदल चलने वालों, साइकिल सवारों, बुजुर्गों और बच्चों को सड़क पार करते समय प्राथमिकता दें।
आदिल इरफान की अंतिम अपील: “सुरक्षित चलें, अपनों को सुरक्षित रखें” ”आएं, हम सभी बिजनौरवासी मिलकर यह संकल्प लें कि न खुद ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करेंगे और न दूसरों को ऐसा करने देंगे। सड़क सुरक्षा को केवल एक हफ्ते या महीने का अभियान न बनाकर अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। सावधानी अपनाना समझदारी है, नियमों का पालन जिम्मेदारी है और किसी की जान बचाना ही सच्ची इंसानियत है।”