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महिला पत्रकार ने CM योगी से सवाल पूछा ही नहीं, फिर मुख्यमंत्री साहब जवाब किसका देते?


लोकतंत्र में पत्रकार का काम सवाल पूछना है और सत्ता का काम उन सवालों का जवाब देना। लेकिन जब सवाल ही न पूछा गया हो और जवाब फिर भी आ जाए, तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर जवाब किस बात का दिया गया?
एक महिला पत्रकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जुड़ा वीडियो इन दिनों चर्चा में है। वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर यह सवाल उठ रहा है कि पत्रकार की ओर से स्पष्ट सवाल पूछे जाने से पहले ही मुख्यमंत्री जवाब देते दिखाई दे रहे हैं।
मामला सिर्फ एक वीडियो या कुछ सेकंड की बातचीत का नहीं है। असली सवाल पत्रकारिता की भूमिका और संवाद की मर्यादा का है। अगर पत्रकार ने सवाल नहीं पूछा, तो मुख्यमंत्री जवाब किस सवाल का दे रहे थे? क्या सवाल पहले से तय था? क्या बातचीत का कोई हिस्सा वीडियो में नहीं है? या फिर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा छोटा वीडियो पूरी बातचीत की तस्वीर पेश नहीं कर रहा?
किसी भी वायरल वीडियो को देखकर तुरंत निष्कर्ष निकालना भी उचित नहीं है। संभव है कि वीडियो का कोई हिस्सा काटा गया हो या बातचीत का संदर्भ कुछ और हो। लेकिन यदि वीडियो पूरा है और उसमें सवाल के बिना जवाब दिया गया है, तो यह जिज्ञासा स्वाभाविक है कि आखिर संवाद की शुरुआत किस आधार पर हुई?
पत्रकारिता में सवाल की अहमियत होती है और लोकतंत्र में जवाब की। सवाल गायब हो और जवाब मौजूद हो, तो जनता का सवाल बनना स्वाभाविक है।
आखिर महिला पत्रकार ने सवाल पूछा ही नहीं,
तो CM योगी साहब जवाब किसका दे रहे थे?
यही सवाल अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

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