जबलपुर के बरगी डैम पर नर्मदा की शांत गोद में एक दर्दनाक हादसे ने खुशियों को पल भर में मातम में बदल दिया।
कल शाम की सैर, जो मुस्कुराहटों और सुकून से भरी होनी चाहिए थी, अचानक मौत की लहरों में समा गई। पर्यटन विभाग का क्रूज तेज़ आंधी और ऊंची लहरों के बीच संतुलन खो बैठा और पलट गया।
उस भीड़ में एक मां अपने 4 साल के मासूम बेटे को सीने से लगाए हुए थी। जब गोताखोरों ने उन्हें बाहर निकाला, तो उनका आलिंगन अब भी वैसा ही था—अटूट, अडिग। एक मां, जिसने अपनी आखिरी सांस तक अपने बच्चे को बचाने की कोशिश की… लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था।
अब तक 9 शव बरामद किए जा चुके हैं, 24 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि 9 लोग अब भी लापता हैं।
दिल्ली से आए एक परिवार की खुशियां भी इस हादसे में बिखर गईं—पिता और बेटी तो बच गए, लेकिन मां और बेटा हमेशा के लिए नर्मदा की गहराइयों में समा गए।
यह दृश्य और यह घटना हमें झकझोर कर याद दिलाती है कि जीवन कितना अनिश्चित और नाज़ुक है।
ईश्वर से प्रार्थना है कि लापता लोग सकुशल मिलें और शोक संतप्त परिवारों को इस असहनीय दुःख को सहने की शक्ति मिले।

