कर्तव्य के साथ इंसानियत की मिसाल बने एआरटीओ हरिओम, चालान काटने के बाद सरकारी गाड़ी से बच्चों को पहुंचाया घर नियमों का पालन भी जरूरी और बच्चों की सुरक्षा भी सर्वोपरि—बदायूं में एआरटीओ हरिओम के संवेदनशील कदम ने पेश की मानवता की मिसाल।
बदायूं, उत्तर प्रदेश। सरकारी अधिकारी की पहचान केवल उसके पद और अधिकारों से नहीं, बल्कि उसके कर्तव्यबोध, संवेदनशीलता और मानवीय व्यवहार से भी होती है। उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में एआरटीओ हरिओम ने अपने एक सराहनीय कदम से यह साबित कर दिया कि कानून का पालन कराने के साथ-साथ इंसानियत निभाना भी उतना ही जरूरी है। जानकारी के अनुसार, एआरटीओ हरिओम अपनी ड्यूटी के दौरान वाहनों की चेकिंग कर रहे थे। इसी बीच उनके सामने एक ऐसा ऑटो रिक्शा आया, जिसमें निर्धारित क्षमता से अधिक स्कूली बच्चे बैठे हुए थे। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने ऑटो रिक्शा का चालान किया और यातायात नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की। लेकिन एआरटीओ हरिओम की जिम्मेदारी केवल चालान काटने तक ही सीमित नहीं रही। बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने अपनी सरकारी गाड़ी से सभी बच्चों को उनके घर तक पहुंचाया। उनका यह कदम बताता है कि एक जिम्मेदार अधिकारी नियमों का पालन कराने के साथ-साथ आम नागरिकों की समस्याओं और सुरक्षा के प्रति भी संवेदनशील हो सकता है। आज जब स्कूली बच्चों को ले जाने वाले वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने और उनकी सुरक्षा से समझौता करने के मामले सामने आते रहते हैं, ऐसे में एआरटीओ हरिओम का यह कदम एक सकारात्मक संदेश देता है। यह घटना वाहन चालकों और स्कूल प्रबंधन को भी याद दिलाती है कि बच्चों की सुरक्षा के मामले में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए। एआरटीओ हरिओम का यह प्रयास बताता है कि वर्दी और पद की असली गरिमा तब बढ़ती है, जब अधिकारों के साथ संवेदनशीलता और कर्तव्य के साथ मानवता भी दिखाई दे। ऐसे कार्य न केवल विभाग की सकारात्मक छवि को मजबूत करते हैं, बल्कि समाज में जिम्मेदारी और इंसानियत की भावना को भी प्रोत्साहित करते हैं।