कानपुर में मानवता को शर्मसार कर देने वाला एक बड़ा किडनी तस्करी रैकेट सामने आया है, जिसे डॉक्टर दंपति समेत कई लोगों द्वारा चलाया जा रहा था। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि यह गिरोह गरीब और जरूरतमंद लोगों को लालच देकर उनकी किडनी महज 6 से 10 लाख रुपये में खरीदता था और फिर वही किडनी मरीजों को 60 से 80 लाख रुपये तक में बेच देता था।
इस पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ तब हुआ जब बिहार के एक MBA छात्र ने किडनी देने के बाद तय रकम न मिलने पर शिकायत की। मामूली पैसों के विवाद ने इस अंतरराज्यीय रैकेट की परतें खोल दीं, जिसके बाद पुलिस ने कई निजी अस्पतालों पर छापेमारी कर डॉक्टर दंपति सहित कई आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
जांच में सामने आया कि बिना किसी वैध दस्तावेज और मेडिकल प्रोटोकॉल के मरीजों के अंग निकाले जा रहे थे। दलालों के माध्यम से डोनर तलाशे जाते थे और फर्जी कागजात बनाकर ट्रांसप्लांट की पूरी प्रक्रिया को वैध दिखाया जाता था। इस गिरोह द्वारा दर्जनों अवैध ट्रांसप्लांट किए जाने की आशंका जताई जा रही है।
पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त कार्रवाई में इस रैकेट के कई अहम सदस्यों की गिरफ्तारी हुई है और अब पूरे नेटवर्क के तार अन्य शहरों और राज्यों तक खंगाले जा रहे हैं। इस कार्रवाई के बाद चिकित्सा जगत में हड़कंप मच गया है और अस्पतालों की निगरानी और सख्त किए जाने की बात कही जा रही है।
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि जब लालच हद पार कर जाए, तो सफेद कोट भी इंसानियत को बचाने की बजाय उसका सौदा करने लगता है।

